Friday, September 4, 2009

में तुमसे कभी नाराज़ नहीं हों सकता


visit.. http://www.mahaktepal.कॉम

उसने कहा है मुझसे

में तुमसे कभी भी

नाराज़ नहीं हों सकता


मैने कहा क्यों भला

कोई तो ऐसी बात कभी

हों सकती है जो तुम्हे

मुझसे नाराज़ कर जाये

या मेरी कोई एक गलती

तुम्हे मुझसे दूर ले जाये

ये भी मन में आया

कही ये बातें तेरी

जान ही ले ले ना मेरी

उन सबकी बातों जैसी

मीठी तो नहीं है तेरी बातें

जो उन लोगों ने कही मुझसे

जिनपे मैंने एतवार किया

और उन्होंने मेरे एतवार का

मेरे सभी जज्बातों का

एक पल मैं संहार किया

फिर भी ना जाने क्यों

कई बार ऐसा मन करता है

तुम सच कह रहे हों

तुम्झ पे में एतवार करूँ

ये मेरा मन कहता है

तुमने भी तो कहा है मुझसे

तुमसे नाराज़ होने का मतलब

जैसे मैने मेरी खुशियों को

खुद से नाराज़ किया है

इसलिए तेरी हर बात को मै

अब सच मान के एक कम करुँगी

तुमसे ना मै नाराज़ होउंगी

ना तुझे कभी नाराज़ करुँगी

हर सुच दुःख मै तेरे सदा

मै साथ रहूंगी हाँ तेरे साथ रहूंगी


8 comments:

Fauziya Reyaz said...

bahut hi khoobsurat rachna...aapne achha likha hai...

राज भाटिय़ा said...

बहुत खुब इस कविता के बोल एक विशवास को दर्शाते है, एक अटुट प्यार को बहुत बहुत धन्यवाद

gyaneshwaari singh said...

fauziya ji aur raj ji
bahut bahut shukriya apne bhavnao ko smajha aur saraha

रश्मि प्रभा... said...

phir koi shikaayat nahi hogi........hai n? bahut badhiyaa

jitendra said...

sakhi with feeling.... aap na sirf ek achi kavita likhi hai. balki jeewan ke har roop main chupe ehsaas ko bhi dhonnda hai. aap mere blog par jakar meri bhawnaon ko dekha iske liye sukriya....

विजय तिवारी " किसलय " said...

मैं तुमसे कभी नाराज़ नहीं हो सकता , बड़ी प्यारी और सुंदर से अभिव्यक्ति है, जिसमें आडंबर कम एहसास और सत्यता अधिक परिलक्षित होती है.
- विजय तिवारी

gyaneshwaari singh said...

shukriya aap sbhai ka jo apne saraha

Bhawna said...

सुंदर रचना, सरल हृदय का आभास देती है।

आपका मेरे इस ब्लॉग पर हार्दिक स्वागत है ...

आप यहाँ आये बहुत खुशी हुई .आपका प्यार और साथ हमेशा बना रहे, तो बहुत खुशी होगी. ये साथ और प्यार बनाए रखना.

प्यार के साथ
सखी