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मैं तुझसे जितना दामन
छुडाती हूँ ...००.३९ ऍम ..१३/३/१३
उतने ही पैर पसार तू
मेरे सिर से पैर तक
तू रेंगता चला आता है ...
ए दर्द ! भला अब तू ही बता
तेरा मेरा कितना गहरा नाता
है ?
में चाहती हूँ तू रहे दूर
कहीं
और में तुझसे दूर कहीं,
पर क्यों तुझे बस एक
मेरा ही साथ हमेशा भाता है ?
दर्द बता दे आज मुझे
सच सच कहना चुप न रहना
तू हरदम क्यों आज कल
बस मुझ तक खिंचा आता है ?
क्यों साथ मेरा तुझे भाता
है ?
जिनसे नाता जोड़ा मैंने
सबने तोड़ दिया रिश्ता
अपना-पण तो मिला नहीं
दर्द मिला मेरा हिस्सा.
चाहत बस इतनी सी थी कि
प्यार भरी मुस्कान मिले
पर अनजानी थी मैं कि
मुझे दर्द से जीवनदान मिले,
सुनते है दिल के रिश्ते भी
खून से पक्के होते है ...
पर कुछ लोग अहसास से परे
झूंठे रिश्ते ढोते है
बस झूंठे रिश्ते ढोते है.
.

8 comments:
रिश्तों के टूटने की चुन्बह दर्द का एहसास कराती है ... टीस लिए रचना ...
उम्दा कविता
wow...gud 1
wow...gud 1
jab dard paaltoo nahi balki faaltoo samjhoge to apne aap door ho jayega.
दिगम्बर नासवा जी, अरुण जी, सुमित जी, हामिद जी बहुत बहुत शुक्रिया
सखी ,
जहाँ प्यार बहुत होता है वह जब छोटी सी बात भी बहुत जयादा दुःख का अहसास करा जाती है
हमें उससे दूर होने का अहसास ही पुरे दिलो दिमाग को झंझोड देता है तुम्हारी सुंदर रचना है .....
thnx
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