Thursday, June 9, 2016

दो भजन माँ के

visit.. http://www.mahaktepal.com

दो भजन

[09/06 15:20] Gyaneshwari 'sakhi' singh: माँ कामख्या महाशक्ति है, सिद्धि पीठ की देवी हैं
बसी किनारे ब्रह्मपुत्र के, नीलांचल पर बैठी हैं।
माँ कामख्या, मेरी माँ कामख्या ।

रचो नया संसार ये कहने,तुम हो योनि रूप में माँ,
सर्वशक्ति संपन्न तुम्ही हो, तेरे जैसा कोई कहाँ।
देवों के वंदन में भी तो, माँ कामख्या रहती है।
बसी किनारे ..............…...
माँ कामख्या , मेरी माँ कामख्या (1)

तंत्र मन्त्र में सिद्धि पाये , भक्त तेरे कर साधना,
माँ देती है ज्ञान सभी को, करें तपस्वी अर्चना।
माँ के दर पर पाये, सबकी चाहत रहती है।
बसी किनारे….........
माँ कामख्या ,मेरी माँ कामख्या (२)

मुक्तिधाम माँ तेरा आँगन, करे जो कोई तेरे दर्शन,
भेड़,मेमना, मुर्गा लाकर, करें भक्तजन तुझको अर्पण।
माँ ममता बरसाती सबपर, सारी दुनिया कहती है।
बसी किनारे..........
माँ कामख्या, मेरी माँ कामख्या। (3)

माँ कामख्या माह शक्ति है, सिद्धि पीठ की देवी है
बसी किनारे .........
माँ कामख्या , मेरी माँ कामख्या।
[09/06 19:11] Gyaneshwari 'sakhi' singh: तेरे दर पर आकर एक सवाली माँ करती है पुकार
माँ मेरी अपने बच्चों को , सब कष्टों से उबार।

महामुद्रा है , तू शक्ति है, भक्तों की ही तू भक्ति है।
तुही पार्वती मात भवानी,तू चिंतामणि जगकल्याणी।
कभी तू दुर्गा कभी भैरवी, नतमस्तक तेरे आगे हम सभी,
तेरे रूप अनेक हैं माता, तेरा हर एक रूप है भाता।
तेरे दर पर आकर तेरा, रूप रहे माँ निहार।
माँ मेरी अपने बच्चों को .....................(1)

महाकाली बन काल बुलाये, धरती से सब दुष्ट मिटाये।
माँ जो कन्या रूप में आये, सबके घर समृध्दि लाये।
पर्वत पर्वत बैठी है माँ, भक्तों को तर देती है माँ।
माँ की महिमा अपरम्पार, माँ से भक्तो को है प्यार।
माँ तू दाल के दया दृष्टि, हर उलझन से निकाल।
माँ मेरी अपने............. (2)

No comments:

आपका मेरे इस ब्लॉग पर हार्दिक स्वागत है ...

आप यहाँ आये बहुत खुशी हुई .आपका प्यार और साथ हमेशा बना रहे, तो बहुत खुशी होगी. ये साथ और प्यार बनाए रखना.

प्यार के साथ
सखी