Wednesday, October 28, 2015

कुछ वक़्त के दायरे से निकल



गठरी बांधे रात पड़ी थी तेरे मेरे बीचों बीच
धूप सुनहरी आन खड़ी थी तेरे मेरे बीचो बीच |
सखी सिंह , मुंबई
11.33 pm…28/10/15

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प्यार के साथ
सखी