Wednesday, February 27, 2013

( बसंत और सावन )

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ऋतुओं के रंग फीके – फीके , छटा बसंती भर जाना ,


मेरे प्यासे मन आंगन में , तुम सावन बनकर आना .

2 comments:

दिगम्बर नासवा said...

बहुत सुन्दर ... प्रेम की बासंती महक लिए ...

gyaneshwaari singh said...

shukriya

आपका मेरे इस ब्लॉग पर हार्दिक स्वागत है ...

आप यहाँ आये बहुत खुशी हुई .आपका प्यार और साथ हमेशा बना रहे, तो बहुत खुशी होगी. ये साथ और प्यार बनाए रखना.

प्यार के साथ
सखी