Monday, March 29, 2010

नाजुक नाजुक दिल वाले


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किसी की रचना की कुछ पंक्तियों से प्रेरित होकर कुछ ख्याल आया जो अब आपके सामने है .....

क्यों नाजुक नाजुक दिल वाले
अक्सर ही ऐसे होते है
हँसते है या रोते है
या दिल मे ख्वाब पिरोते है

ये नाजुक नाजुक दिल वाले
सब जानते है फिर भी तो ये
कभी अपना किसी को कहकर के
दिल टूटने पे सुख खोते है

बैचैन बने जब प्यार करे
ये तन मन जान निसार करे
पर कोई जब भी वार करे
फिर बस गम ही गम ढोते है

8 comments:

रश्मि प्रभा... said...

नाज़ुक दिलवालों की हर बात नाज़ुक सी होती है

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर जी, धन्यवाद

Manoj kr singh said...

बहुत सुंदर रचना लिखी है अपने सखी जी
ये नाजुक नाजुक दिल वाले

Manoj kr singh said...

बहुत सुंदर रचना लिखी है अपने सखी जी
ये नाजुक नाजुक दिल वाले

Mayur Malhar said...

bhaut umda rachana hai.

Ravi Rajbhar said...

jee han,
fir gam hi gam dhote hain...
ye najuk dil wale yese hi hoten hain.
bahut sunder rachna.

Shruti said...

concept is good

-Shrut

gyaneshwaari singh said...

aap sabhi ka dil se abhar vaykat karti hun

sakhi

आपका मेरे इस ब्लॉग पर हार्दिक स्वागत है ...

आप यहाँ आये बहुत खुशी हुई .आपका प्यार और साथ हमेशा बना रहे, तो बहुत खुशी होगी. ये साथ और प्यार बनाए रखना.

प्यार के साथ
सखी