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किसी की रचना की कुछ पंक्तियों से प्रेरित होकर कुछ ख्याल आया जो अब आपके सामने है .....
क्यों नाजुक नाजुक दिल वाले
अक्सर ही ऐसे होते है
हँसते है या रोते है
या दिल मे ख्वाब पिरोते है
ये नाजुक नाजुक दिल वाले
सब जानते है फिर भी तो ये
कभी अपना किसी को कहकर के
दिल टूटने पे सुख खोते है
बैचैन बने जब प्यार करे
ये तन मन जान निसार करे
पर कोई जब भी वार करे
फिर बस गम ही गम ढोते है
8 comments:
नाज़ुक दिलवालों की हर बात नाज़ुक सी होती है
बहुत सुंदर जी, धन्यवाद
बहुत सुंदर रचना लिखी है अपने सखी जी
ये नाजुक नाजुक दिल वाले
बहुत सुंदर रचना लिखी है अपने सखी जी
ये नाजुक नाजुक दिल वाले
bhaut umda rachana hai.
jee han,
fir gam hi gam dhote hain...
ye najuk dil wale yese hi hoten hain.
bahut sunder rachna.
concept is good
-Shrut
aap sabhi ka dil se abhar vaykat karti hun
sakhi
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