सखी जी आपकी ये छोटी सी कविता बहुत गहरा प्यार समेटे हुए है... कुछ बिम्ब नए हैं.. जैसे ... "उगता हुआ सूरज पानी से उभर रहा हो" या फिर "उसका रंग मेरे चेहरे पे चढ़ रहा हो ."... खूबसूरत रचना ! बधाई !
सखी जी आपकी ये छोटी सी कविता बहुत गहरा प्यार समेटे हुए है... कुछ बिम्ब नए हैं.. जैसे ... "उगता हुआ सूरज पानी से उभर रहा हो" या फिर "उसका रंग मेरे चेहरे पे चढ़ रहा हो ."... खूबसूरत रचना ! बधाई !
9 comments:
bahut accha likha hai
sakhi ji apne
waw kya bat hai .............
WAH! WAH! WAH!
Wah wah wah....
qaabil-e-tareef rachna hai aapki sakhi ji..aap hamesha hee kamaal karti hain!!
badjiya!!! umda!!!...:)
bahut pyaare lage ye khyaal
shukriya aap sabhi ke comments ke liye
सखी जी आपकी ये छोटी सी कविता बहुत गहरा प्यार समेटे हुए है... कुछ बिम्ब नए हैं.. जैसे ... "उगता हुआ सूरज पानी से उभर रहा हो" या फिर "उसका रंग मेरे चेहरे पे चढ़ रहा हो ."... खूबसूरत रचना ! बधाई !
सखी जी आपकी ये छोटी सी कविता बहुत गहरा प्यार समेटे हुए है... कुछ बिम्ब नए हैं.. जैसे ... "उगता हुआ सूरज पानी से उभर रहा हो" या फिर "उसका रंग मेरे चेहरे पे चढ़ रहा हो ."... खूबसूरत रचना ! बधाई !
शुक्रिया अरुण जी आपने सराहा
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