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जो न सोचा था वो पल आया है
प्यार में सब ही तो गंवाया है
तेरे होने का भरम टूट गया
दिल तेरे साथ था पर रूठ गया
तुम साथ न थे मगर फिर भी
मैंने समझा की तुम साथ में हो
एक तेरा आसरा था छूट गया
दिल तेरे साथ था पर रूठ गया
कितने अरमान से रखा था तुझे
अपने सीने में छिपा कर मैंने
प्यार मेरा तो बस झूट -मूठ गया
दिल तेरे साथ था पर रूठ गया
जो भांप लेते हो तुम भाव मेरे
फिर न समझी क्यों मेरी धड़कन
न वर्त्तमान है , संग भूत गया
दिल तेरे साथ था पर रूठ गया

8 comments:
सुदर कविता... दिवाली की हार्दिक शुभकामना !
shukriya ji
क्या कहने
बहुत सुंदर
bahut sundar marmsparshi rachna..
बेहतरीन प्रस्तुती...
महेंद्र जी
कविता जी
सुषमा जी
आप सभी का ह्रदय से आभार व्यक्त करती हूँ.
सखी जी बहुत सुन्दर भाव और अच्छी प्रस्तुति
..भ्रमर ५
अपने सीने में छिपा कर मैंने प्यार मेरा तो बस झूट -मूठ गया दिल तेरे साथ था पर रूठ गया
बहुत जज्बाती रचना. बहुत दिनों बाद आपको पढ़ा, अच्छा लगा. मेरे ब्लॉग पर आने के लिए धन्यवाद.
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