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लहू मेरा बहा जो ,
तब ही कोई रंग लाएगा ,
अगर माँ बहन में,
मेरा ही चेहरा नज़र आएगा ,
मेरा जाना यूँ जां से ,
तब तक न काम आएगा ,
किया बर्बाद मुझे जिसने,
जब तक वो न सज़ा पायेगा ,
मुझे जो नाम देके दामिनी
तुमने पहचाना है,
मेरी तड़प-जलन को हर शक्श
अब खुद में भी पायेगा ....रात्रि १०.४५ , २९/१२/१२
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