
अपने बिखरे ख्वाबो की अर्थी सजाए जाते है
ये ले तेरी दुनिया से खुद को मिटाए जाते है
बिखर गया है जो सवरने से पहले टूट कर
वो वजूद अपना कब्र में दफनाए जाते है
कितने दर्द सभालेगा तू ए दिल मेरे नादान
ये बातें अब खुद ही इस दिल को समझाए जाते है
तेरे हर एक ज़ख्म को दिल में बसा के रख लेंगे
इसलिए सारे जख्म हम दिल में सजाए जाते है
तुमको ना मिले गम बस यही तमन्ना है मेरी
अपने दिल से हर शिकवा तेरे लिए मिटाए जाते है
टुकड़े टुकड़े हो कर हम जी रहे है आज अब
टुकडों - टुकडों में जिंदगी को बिताए जाते है
है रिश्ता कैसा तुझसे ये जिंदगी बता मेरा
हर रिश्ता खुद को भूल कर हम निभाए जाते है.
2 comments:
aapne apni jindagi ke saath itna achha rishta kayam kiya hai jaankar mujhe achha laga...mai apni kavita ki do panktiyan yaha likhna chahoonga.....
तु नहीं तो मै नहीं ,मै नहीं तो तु नहीं
ऐसा याराना दुनिया में कही नहीं है जिंदगी !
ab pata nahi meri jindagi kaun hai aur aapki jindagi kaun hai?
SAKHI JEE
NAMASTE
AAPKE LEKHAN KO DHYAAN SE PADHTA HOON
AUR SOCHTA HOON KI, AAP KE EHSAAS AUR KALPNA KA BAHU AAYAMI KENWAAS KITNA BADA HAI.
IS RACHNA KA EK SHER YE BHI DIL KO CHHO GAYA....
तेरे हर एक ज़ख्म को दिल में बसा के रख लेंगे
इसलिए सारे जख्म हम दिल में सजाए जाते है
AAPKA
VIJAY TIWARI 'KISLAY'
JABALPUR
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