मेरी बहन को समर्पित प्यार के गुल हो खिले हर तरफ़ बहार रहे
जिंदगी में बस सदा तेरे संग प्यार रहे
अपना ये साथ प्यार बनके हरपल महके
अपने रिश्ते का हरदम युही सृंगार रहे
हमने हर गम ही बांटा है सदा मिलके
जीवन में अब खुशियों से निखार रहे
मेरी बहना ये है मेरा कहना तुझसे
जिंदगी का चमन तेरा सदा गुलज़ार रहे
महकती चहकती एक हसी लबो पे रहे
अपने रिश्ते में सदा प्यार का शुमार रहे ....00.00 am....14/2/09

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6 comments:
बहुत अच्छी नज़्म है!
बहन को इससे अधिक क्या चाहिए,
इस प्यार को मेरा प्यार.......
मार्मिक भाव...चौराहे पर आने के लिए धन्यवाद भी.
Really touching poem....i love this poem . Yah pyar hamesh bana rahe . Aamin....
Regards
भावपूर्ण रचना वाह वाह!
sakhi ji aap to kaamal hai
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