Saturday, February 14, 2009

अपने रिश्ते में सदा प्यार का शुमार रहे

मेरी बहन को समर्पित

प्यार के गुल हो खिले हर तरफ़ बहार रहे
जिंदगी में बस सदा तेरे संग प्यार रहे

अपना ये साथ प्यार बनके हरपल महके
अपने रिश्ते का हरदम युही सृंगार रहे

हमने हर गम ही बांटा है सदा मिलके
जीवन में अब खुशियों से निखार रहे

मेरी बहना ये है मेरा कहना तुझसे
जिंदगी का चमन तेरा सदा गुलज़ार रहे

महकती चहकती एक हसी लबो पे रहे
अपने रिश्ते में सदा प्यार का शुमार रहे ....00.00 am....14/2/09



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6 comments:

Vinay said...

बहुत अच्छी नज़्म है!

रश्मि प्रभा... said...

बहन को इससे अधिक क्या चाहिए,
इस प्यार को मेरा प्यार.......

चण्डीदत्त शुक्ल-8824696345 said...

मार्मिक भाव...चौराहे पर आने के लिए धन्यवाद भी.

Dev said...

Really touching poem....i love this poem . Yah pyar hamesh bana rahe . Aamin....
Regards

Prakash Badal said...

भावपूर्ण रचना वाह वाह!

Anonymous said...

sakhi ji aap to kaamal hai

आपका मेरे इस ब्लॉग पर हार्दिक स्वागत है ...

आप यहाँ आये बहुत खुशी हुई .आपका प्यार और साथ हमेशा बना रहे, तो बहुत खुशी होगी. ये साथ और प्यार बनाए रखना.

प्यार के साथ
सखी