Wednesday, May 20, 2009

क्या कहू




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तुम आये जिंदगी में

एक बहार बनके

छाये हम पर
खुमार बन कर
जिंदगी में भरी
सपने और खुश्बू
मैं इनमे गुम हों चली
खुद से बिछड़ने लगी
फिर अचानक क्या हुआ

कुछ समझ न सकी
घिरी खड़ी थी तूफ़ान से
बिखरे पड़े अरमान थे
सब तितर बितर हों चला
हर तरफ बस सन्नाटा पड़ा
तुम न जाने कहा गम हुए
सपने भी सब अधूरे हुए
कुछ समझी नहीं थी
मै तो तब भी वही थी
ये अचानक क्या हुआ था
तू क्यों दूर मुझसे हुआ था
फिर खुद को संभाल लाई हू
अब क्या करू , तुम कहो
क्या करू , तुमसे अब क्या कहू

2 comments:

विजय तिवारी " किसलय " said...

सखी जी,
सच में जब कोई हमारा दुःख दर्द बाटने वाला मिलता है तो खुशियों की झडी लग जाती है,
लेकिन जब वो बिछुड़ जाता है तो मानो पतझड़ आ जाता है
लेकिन , हमें धैर्य और बुद्धि से काम लेना चाहिए,
क्योंकि पतझड़ के बाद फिर से बहार खिलती है.
खुशियाँ भी वापस आती हैं ,
हमें ईश्वर पर विश्वास रखना चाहिए.
- विजय

gyaneshwaari singh said...

marm ko smajha apne acha laga

आपका मेरे इस ब्लॉग पर हार्दिक स्वागत है ...

आप यहाँ आये बहुत खुशी हुई .आपका प्यार और साथ हमेशा बना रहे, तो बहुत खुशी होगी. ये साथ और प्यार बनाए रखना.

प्यार के साथ
सखी