सखी जी, अभिवंदन मैंने जब भी पढ़ा , आप की रचनाएं भले ही स्वरुप में छोटी ही क्यों न हों, लेकिन सतसैया के दोहों की तरह दिल में गहरी चोट पहुंचाते हैं. इन चार पंक्तियों में आप्ने प्यार करने वालों के मन की शंका को प्रर्दशित किया है जो वाजिब है, आज ऐसा होना कोई बड़ी बात नहीं है कि चाहने वाला स्वार्थ वश आपसे प्रेम कर रहा हो अच्छी पंक्तियाँ हैं.
तुने मुझे जिंदगी में शामिल कर तो लिया है पर क्या तुने मुझे मुकम्मिल दिल दिया है या फिर लेकर मेरे नाम का कोई धागा तुने अपने किसी पुराने जख्म को सिया है
8 comments:
सखी जी,
अभिवंदन
मैंने जब भी पढ़ा , आप की रचनाएं भले ही स्वरुप में छोटी ही क्यों न हों, लेकिन सतसैया के दोहों की तरह दिल में गहरी चोट पहुंचाते हैं.
इन चार पंक्तियों में आप्ने प्यार करने वालों के मन की शंका को प्रर्दशित किया है जो वाजिब है,
आज ऐसा होना कोई बड़ी बात नहीं है कि चाहने वाला स्वार्थ वश आपसे प्रेम कर रहा हो
अच्छी पंक्तियाँ हैं.
तुने मुझे जिंदगी में शामिल कर तो लिया है
पर क्या तुने मुझे मुकम्मिल दिल दिया है
या फिर लेकर मेरे नाम का कोई धागा
तुने अपने किसी पुराने जख्म को सिया है
आप अपना लेखन जारी रखें.
- विजय
क्या कहूं क्या बात है सखी जी .........
फिर लेकर मेरे नाम का धागा......
पुराने जख्मों को सिया है...
बहुत ही गहरे जज्बात हैं.....
अक्षय-मन
bahut hi badhiyaa
क्या मुकम्मिल दिल दिया है..?
इतनी सी है बस आरजू,अब हमारी ,श्याम ,
सच कहिये हम भी आपकी ,नज़रों में आगये।
bahut sundar aur arthpurn rachna badhai ji badhai
bhut sachhe bhav.
vijay ji, akshay, rashmi ji, dr, shyam gupta, bhavana ji, mukul ji, shobhana ji
aap sabhi ka bhaut bhaut shukriya sarahne ke liye mere is ek swaal ko.
sakhi with love
या फिर लेकर मेरे नाम का कोई धागा
तुने अपने किसी पुराने जख्म को सिया है.
Bahut achchha socha aur likha hai..
Ya shayad..
Bahut sachcha socha aur likha hai..
Sahi bhavna ke liye sahi shabd.. Perfect.
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