Sunday, June 14, 2009

ऊपर वाले की रजा

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घाव रिसते है
लहू बहता नहीं है
जख्म दिखते तो है
दर्द अब रहता नहीं है
जिंदगी घाव पे घाव
जो दिए जाती है
हम भी हर जख्म
हसकर सह लेते है
देखंगे कब तलक
युही सिलसिला चलेगा
मुह से ना उफ़
हम भी कहते है
मेरी तकदीर का
ये खेल है शायद
या फिर ऊपर वाले की
इसमें कोई रजा है
या फिर हों सकता है
मेरे किसी कर्म की
ये कोई दी गयी सज़ा है

10 comments:

!!अक्षय-मन!! said...

या फिर हो सकता है मेरे किसी कर्म की ये दी गई सजा है....
यहाँ आपने कमाल का कहा है......
यही तो बात है नेक दिल की किसी की बुराई न करते हुए खुद को ही सजा का हक़दार बना लिया कर्मो की ओठ लेते हुए,.....वाह सखी जी वाह.....
दिल को छु गई आपकी ये रचना.......

ρяєєтii said...

जख्म दिखते तो है, दर्द अब रहता नहीं है
देखंगे कब तलक युही सिलसिला चलेगा,

bahut gahre bhawo ki abhivyakti hai..!

vijay kumar sappatti said...

sakhi

just amazing thoughts expressed in emotional words.....

aap to bahut accha likhti hai ..aapki kavitayen bahut der se padh raha hoon ..

is sajiv chitran ke liye aapko badhai ..

vijay
pls read my new sufi poem :
http://poemsofvijay.blogspot.com/2009/06/blog-post.html

shyam gupta said...

वो तो ज़ख्मे दिलों को छुपाते रहे।
बात हंस हंस के सुनते सुनाते रहे।

वो भी घायल हैं कब थी हम को खबर,
खुद खुश-खुश हो सबको हंसाते रह।

बात ज़ख्मों की दीगर हुई ’श्याम अब,
हम को चर्चे दिलों के सुहाते रहे।

gyaneshwaari singh said...

akshay

shukriya apne rachna ko smajha aur saraha..
nek dil hai magar kabhi galti to kar hi skata hai insaan bhi hai na
shurkiya sath banaye rakhna

अंतस said...

आप ने पूछा है तो पूरे हक के साथ कहूँगा.......

सखी, अच्छी कविता के लिए कई सारे भावों की आवश्यकता होती है, ये जरूरी है की हम अपने भावों को (सभी भावों को) बराबर प्राथमिकता दें, वैसे तो एक कविता एक ही भाव पर होती है, पर हर कविता एक ही भाव पर हो तो मज़ा कम आता है..........

आप की अधिकाँश रचनाएं आप के दिल की हालत को बयान करती हैं, यह अच्छी बात है, पर दिल में सिर्फ़ दर्द नही होता, कभी कभी खुशी, नफरत, गुस्सा, ईर्ष्या और ना जाने क्या क्या भाव भी आते हैं..........कभी इन पर भी लिखने की कोशिश करिए..........

कभी अपने देश अपने लोगों के लिए भी लिखिए.......कभी फूलों, पत्तों पे लिखिए.......ओस की बूंदों में सिर्फ़ चमक नही होती, खुशबू भी होती है कभी उसे करीब से महसूस कर के, उस पे कुछ लिखिए........

फिर देखिये आप की कविता में आप को ख़ुद हजारों नए रंग दिखने लगेंगे, जब भी अपनी कविता की बुराई करानी हो हमें याद कर लीजियेगा............अभी कई साल जिन्दा रहने का इरादा है हमारा..........

gyaneshwaari singh said...

shukriya preeti ji

love u

gyaneshwaari singh said...

vijay ji
acha laga apko mere creation ache lage..
apki poem meine padi hai wo sufi wali achi lagi

gyaneshwaari singh said...

वो तो ज़ख्मे दिलों को छुपाते रहे।
बात हंस हंस के सुनते सुनाते रहे।

वो भी घायल हैं कब थी हम को खबर,
खुद खुश-खुश हो सबको हंसाते रह।

बात ज़ख्मों की दीगर हुई ’श्याम अब,
हम को चर्चे दिलों के सुहाते रहे।


kya baat hai shyam ji
bahut achi gazal lekar aaye aap..khuch aur sher add ho ajye to maza aa jaye
shurkiya aapne waqt diya
regards
sakhi

gyaneshwaari singh said...

gaurav ji
apko pahle hi me ans de chuki hun magar phir kahungi jaldi hi kai bhav dekhne ko milenge apko...:)
shuriya aapne waqt diya

आपका मेरे इस ब्लॉग पर हार्दिक स्वागत है ...

आप यहाँ आये बहुत खुशी हुई .आपका प्यार और साथ हमेशा बना रहे, तो बहुत खुशी होगी. ये साथ और प्यार बनाए रखना.

प्यार के साथ
सखी