Thursday, June 11, 2009

अश्क आँखों से यूँ पिघलते है


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जैसे शब् में चिराग जलते है
मेरे दिल में ख्वाब पलते है

हम इस तरह तुझे याद करते है
जैसे हम संग - संग चलते है

जैसे झरने से गिर रहा हो जल
अश्क आँखों से यूँ पिघलते है
लगे धूप अक्सर इश्क में यारों
यूँ तो मौसम कई बदलते है

हर वक्त दिल ख्यालो में गुम है
दिन-रात किसी की याद में ढलते है
16.7 pm..11/6/09

11 comments:

राज भाटिय़ा said...

बहुत ही सुंदर, लेकिन भावूक कर दिया आप के शेरो ने, बहुत दर्द भरा है इन मै.
धन्यवाद

"MIRACLE" said...

शुक्रिया सखी,आप मेरे ब्लॉग पर आयीं ,"मुझे वर चाहिए "रचना नाली के किनारे सलेम के बच्चों को पढाते व़क्त बगल मे बहती नाली मे अनायास मिल गयी थी यह रचना इतनी भीग चुकी थी की एक बार तो उठाने का दिल ही नहीं हुआ था पर दिल मे आया की इसे उठाना चाहिए....बस दिल की आवाज सुनी और रचना मेरे हाथ मे और अब आप के लोगो के सामने..इस रचना ने मुझे तो बहुत झकझोरा है,सोचता हूँ की हमारे समाज मे ऐसा क्यों होता की लड़कियों को नुमाइश की चीज समझा जाता है, इसका अंत क्या है ?....या ऐसे ही चलता रहेगा ....... सखी सही बताऊँ तो उस रात मै सो नहीं पाया था, धन्यबाद सखी आपने सुमन जी के मर्म को समझा ....... वैसे सखी आपकी रचनाओं मे मर्म भरा हुआ है . (अरुण)

gyaneshwaari singh said...

raj ji shukriya

marm ko smajha acha laga

gyaneshwaari singh said...

arun ji
rachna wakai bhaut dil ko chhune wali hai..ya akhun ye sab dekh kar mujhe bhi bhaut dukh hota hai..ladkiyo ko lekar aaj bhi samaj me bhaut kuch aisa hai jo ek ladki ko kai baar jaar jaar rone pe majboor bhi karta hai. me khud ek ladki hu to suman ji ke marm ko kaise na samjh pati bhala...likha hai meien bhi kai baar is tarah ke dard ko...ku ki ye mujhe bahut aahat karta hai.

shukriya apne marm ko pahchana//

aate rahna sath sadaa acha lagega

!!अक्षय-मन!! said...

गहरे भावः लिए एक अच्छी ग़ज़ल सखी जी.....जिसमे दर्द की गहरी अनुभूति होती है ..
कम शब्दों में आपकी बात बहुत ही असरदार होती है जोकि बहुत अच्छी लगती है.........आपको ऊँचा मुकाम हांसिल हो.......मैंने भी कुछ लिखा है...आप देखिएगा......
मैंने भी कुछ लिखा है...आप देखिएगा......

अक्षय-मन

रश्मि प्रभा... said...

bahut hi badhiyaa...nikhaar aata jaa raha hai....

विजय तिवारी " किसलय " said...

सखी जी
बहुत ही प्यारी ग़ज़ल है आपकी
ऐसा लगा कि आपने डूब कर कही है ग़ज़ल.

निम्न दो शेरों में तो आपने सब कुछ कह दिया
सच साथी की याद होती ही है ऐसी.


हर वक्त दिल ख्यालो में गुम है
दिन-रात किसी की याद में ढलते है

हम इस तरह तुझे याद करते है
जैसे हम संग - संग चलते है

उम्दा ग़ज़ल के लिए बधाई.
- विजय

gyaneshwaari singh said...

akshay dua ke liye shukriya...

rashmi ji
shukriya hoshala badate arhne ke liye

vijay ji

shukriya apne saraha

Anand said...

uttam!!

gyaneshwaari singh said...

shukriya anand ji
apne saraha

"Apoorv" said...

Sakhi sabse pehle aapke wakt ke liye shurkiya ki aapne mera blog padha.

Aapki yeh rachna bahut achchhi lagi. khaas kar:

जैसे झरने से गिर रहा हो जल
अश्क आँखों से यूँ पिघलते है

लगे धूप अक्सर इश्क में यारों
यूँ तो मौसम कई बदलते है

Achchha khayal tha. Mera blog har dard ke mausam me kuchh lekar saamne aata hai. Aate rahiyega. Achchha lagega.

आपका मेरे इस ब्लॉग पर हार्दिक स्वागत है ...

आप यहाँ आये बहुत खुशी हुई .आपका प्यार और साथ हमेशा बना रहे, तो बहुत खुशी होगी. ये साथ और प्यार बनाए रखना.

प्यार के साथ
सखी