Sunday, September 26, 2010

तब याद तेरी हर तरफ बिखरा के रो दिए

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मेरी ये गज़ल अमर उजाला कानपुर से प्रकाशित हुई ...नबम्बर २००८ में ...


आप सभी के लिए यहाँ पोस्ट कर रही हूँ ब्लॉग पर ...




तनहाईयाँ मिली तो हम घबरा के रो दिए
जब याद तेरी आई,तो दिल तड़पा के रो दिए


जब ना दिखा कोई भी हमें अपने आस पास
तब याद तेरी हर तरफ बिखरा के रो दिए


तुम इस तरह गये,हर खुशी साथ ले गये
जब दुख ने आके घेरा, तो घबरा के रो दिए


कोई भी याद ना करे हमें आज कल' सखी'
ये बात याद आई,दिल को समझा के रो दिए

7 comments:

अरुणेश मिश्र said...

विरह का उत्कर्ष ।
प्रशंसनीय ।

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

aapki ye gazal padh ke hum ro diye!

मुकेश कुमार सिन्हा said...

tanhai mili to ham ghabra ke ro diye...:)

aisa sab ke saath hota hai....:)

bahut khubshurat gajal...:)

सुनील गज्जाणी said...

sunder hai aap ki abhivyakti ,
sadhuwad

उपेन्द्र नाथ said...

shakhi ji

virah ki sachchi abhivayakti

Unknown said...

बहुत ही शानदार गज़ल...
तारीफे-क़ाबिल...

"तब याद तेरी हर तरफ बिखरा के रो दिये"...

क्या बात है !!!

"Apoorv" said...

Achchhe vicharon ko bahut hi achchhe tareeke se piroya hai aapne.
Umda khayal ke saath poora insaaf kiya hai..
Bahut hi achchha laga :)

आपका मेरे इस ब्लॉग पर हार्दिक स्वागत है ...

आप यहाँ आये बहुत खुशी हुई .आपका प्यार और साथ हमेशा बना रहे, तो बहुत खुशी होगी. ये साथ और प्यार बनाए रखना.

प्यार के साथ
सखी