Wednesday, September 22, 2010

* ~ महक~*

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तेरी यादों की   महक से खिल उठा मन का गुलाब
अब गुलाबों की महक से महका करेंगे हम .

8 comments:

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर, यह महक हमे भी महका गई

मनोज कुमार said...

अच्छा है।

Raj said...

मैं जानता हूं कि यह खवाब झूठे हैं,
और यह खुशियां अधूरी हैं,

मगर ज़िन्दा रहने के लेये मेरे दोस्त,
कुछ गलत फहमियां भी ज़रुरी हैं...!

मुकेश कुमार सिन्हा said...

ham to aapke khubsurat pankti se hi mahakne lage.........:)

मनोज कुमार said...

उम्दा! बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!
आभार, आंच पर विशेष प्रस्तुति, आचार्य परशुराम राय, द्वारा “मनोज” पर, पधारिए!

अलाउद्दीन के शासनकाल में सस्‍ता भारत-2, राजभाषा हिन्दी पर मनोज कुमार की प्रस्तुति, पधारें

Manoj kr singh said...

wah

sakhi ji apne to sare bat do laneno m kah di

bahut hi sunder hai .

Amit K Sagar said...

it's only nice!

gyaneshwaari singh said...

आपने कीमती वक्त दिया इसके लिए आप सभी का बहुत बहुत शुक्रिया

आपका मेरे इस ब्लॉग पर हार्दिक स्वागत है ...

आप यहाँ आये बहुत खुशी हुई .आपका प्यार और साथ हमेशा बना रहे, तो बहुत खुशी होगी. ये साथ और प्यार बनाए रखना.

प्यार के साथ
सखी