Wednesday, October 6, 2010

कविता श्रंगार

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 अमित जी की कविता को पढ़ा  तो ये ख्याल आया...

सुंदर कविता की दरकार
क्या में दे दू इश्तिहार ?
शब्दों से हो जिसमे प्यार
भावो के हो रंग हज़ार
हर पंक्ति में बहे बयार
भाव कि ऐसी भरो बहार
हर  पंक्ति  में छलके प्यार
कर  ले फिर कविता श्रंगार 




5 comments:

Anonymous said...

घूमता घूमता यहाँ पहुंचा हूँ..अच्छी रचनायें हैं....यूँ ही लिखते रहे...

उपेन्द्र नाथ said...

bahoot sunder..........

अरुण चन्द्र रॉय said...

"हर पंक्ति में छलके प्यार
कर ले फिर कविता श्रंगार " संक्षिप्त किन्तु सुंदर कविता

Amit Chandra said...

bahut achchi line likhi hai apne.

Manoj kr singh said...

bahut acche bhaw likhe hai apne sakhi ji

आपका मेरे इस ब्लॉग पर हार्दिक स्वागत है ...

आप यहाँ आये बहुत खुशी हुई .आपका प्यार और साथ हमेशा बना रहे, तो बहुत खुशी होगी. ये साथ और प्यार बनाए रखना.

प्यार के साथ
सखी