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एहसास इनको जीना
और इनमे घुटना
ये दो बात है .
कभी ये अहसास
जब हम जीते है
रोम रोम खिलता है
कभी ये अहसास
आग बन पिघलते है
तब अंग अंग जलता है.
है तो ये कुछ अहसास ही न
फिर क्यों जुदा जुदा है
इनको जीने का अंदाज़ .
एहसास इनको जीना
और इनमे घुटना
ये दो बात है .
कभी ये अहसास
जब हम जीते है
रोम रोम खिलता है
कभी ये अहसास
आग बन पिघलते है
तब अंग अंग जलता है.
है तो ये कुछ अहसास ही न
फिर क्यों जुदा जुदा है
इनको जीने का अंदाज़ .

4 comments:
khoobsurat
nice post
सखी जी
बहुत दिनों के बाद आपके ब्लॉग पर आया हूँ. औ बस इस नज़्म पर रुक गया .. दिल में अहसास औ भर गए है ...सच में आपका आभार इस पोस्ट के लिये ..
बधाई !!
आभार
विजय
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कृपया मेरी नयी कविता " फूल, चाय और बारिश " को पढकर अपनी बहुमूल्य राय दिजियेंगा . लिंक है : http://poemsofvijay.blogspot.com/2011/07/blog-post_22.html
surendra ji
richa ji
vijay ji shukriya aapne saraha
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