अपनी भावनाओ को व्यक्त करने की कोशिश ...और क्या करूँ ? क्या ना करूँ की उलझन से खुद को बाहर निकालने का एक सहारा ...
सखी जी काम के बोझ से इन्सान थक तो जाता है पर अपनों का साथ उस थकन को मिटता देता है और एक शक्ति सी मिलती है जब अपना देखता है , जो दिल के पास होता है |
shukriya
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आप यहाँ आये बहुत खुशी हुई .आपका प्यार और साथ हमेशा बना रहे, तो बहुत खुशी होगी. ये साथ और प्यार बनाए रखना.प्यार के साथसखी
3 comments:
सखी जी
काम के बोझ से इन्सान थक तो जाता है पर अपनों का साथ उस थकन को मिटता देता है और एक शक्ति सी मिलती है जब अपना देखता है , जो दिल के पास होता है |
सखी जी
काम के बोझ से इन्सान थक तो जाता है पर अपनों का साथ उस थकन को मिटता देता है और एक शक्ति सी मिलती है जब अपना देखता है , जो दिल के पास होता है |
shukriya
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