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हर एक शब्द तेरी रूह में जब उतरा है, पाके आवाज तेरी लफ्ज लफ्ज जिन्दा हुआ....
तोड़ कर दिल तुमको बुला पास अपने, खुदा क्यों इस खता पर अपनी ना शर्मिंदा हुआ.
तेरी गज़लों के नरम साये है ,
आज हम तुमसे मिलके आये है.
जब बड़े दर्द हद से ज्यादा ,
तेरी आवाज से राहत पाये है .
तुम हो आज भले दूर कहीं ,
मगर साथ तेरी ही वफाये है .
भले ही आंख न देखे तुमको,
रूह तो पास अपने पाये है .
तुम नहीं हो, है अहसास तेरा,
जब भी आवाज तेरी आये है.
तुमसे होने को रु-ब-रु हमने,
तेरे ही शेर गुन - गुनाये है.
तुम्हारी गज़लों में अहसास ऐसे,
फिजा में सिर्फ तेरी खुश्बू आये है.
गज़ल का शहंशाह जो याद आए,
‘सखी’ ने अश्क फिर बहाए है .


4 comments:
बहुत बेहतर, उम्दा। मजा आ गया।
बहुत खूबसूरत समर्पण..
Waah, Behtreen Prastuti
behtareeen........
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