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तुम्हे कुछ याद ही नहीं
और मैं कुछ भूलती नहीं
..
बिडम्बनाओं से त्रस्त जीवन
राह कोई सुझती नहीं .
जीवन में रफ़्तार है कुछ
कुछ तो आपा धापी है
ये दूरी तब आई है
जब कुछ तुमने और
कुछ हमने दूरी नापी है .
००. ३३ ऍम ....१७ . ६.१३
3 comments:
प्रेम रहे तो राह भी निकल आती है अपने आप ...
अति सुन्दर!!!!!!!!!
shukriya digmbar naswa ji aur upemdra ji
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