Tuesday, June 18, 2013

दूरियाँ

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तुम्हे कुछ याद ही नहीं

और मैं कुछ भूलती नहीं 

..
बिडम्बनाओं से त्रस्त 
जीवन 

राह कोई सुझती नहीं .



जीवन में रफ़्तार है कुछ 

कुछ तो आपा धापी है 


ये दूरी  तब आई है 


जब कुछ तुमने और 


कुछ हमने दूरी नापी है .

००. ३३ ऍम ....१७ . ६.१३

3 comments:

दिगम्बर नासवा said...

प्रेम रहे तो राह भी निकल आती है अपने आप ...

उपेन्द्र कुमार सिंह said...

अति सुन्दर!!!!!!!!!

gyaneshwaari singh said...

shukriya digmbar naswa ji aur upemdra ji

आपका मेरे इस ब्लॉग पर हार्दिक स्वागत है ...

आप यहाँ आये बहुत खुशी हुई .आपका प्यार और साथ हमेशा बना रहे, तो बहुत खुशी होगी. ये साथ और प्यार बनाए रखना.

प्यार के साथ
सखी