
कान्हा फिर से तुम अवतार धरो
पग - पग पर है यहाँ कंस
उन सबका तुम संहार करो
कान्हा फिर से तुम अवतार धरो
जात - पात का ऊंच -नीच का
भेद यहाँ पर फैला है
मनुज मनुज को इंसान समझे
ऐसा तुम उपकार करो
हर तरफ़ है व्याप्त बुराई
और अधर्म का राज हुआ
आ जाओ तुम प्रेम सिखाने
सबके दिलो में प्यार भरो
नरकासुर फिर बसे यहाँ पर
जीना मुश्किल सबका है
आकर वध इसका कर डालो
इस युग में अमन बहार भरो
जीने को सब जी तो रहे है
तिल - तिल कर सब जीते है
आ कर जीना आसान कर दो
इन सबका कुछ उद्धार करो
4 comments:
excellent.........बात तो आपकी बिल्कुल सही है! उम्मीद करता हूँ की कान्हा आपकी पुकार सुने और अवतार ले.....वैसे अब उन्हें अवतार लेने देना या नहीं लेने देना,हमलोगों के हाथ मे ही है!.....वैसे हर साल तो वो अवतार लेते ही है, मैंने सही बोला न ? ............एक बेहद खूबसूरत रचना
कृष्ण अब थक चुके है,अब तो वो इतने थक चुके है की अब खुद अवतार लेना उनके वश मे नहीं है.......उन्हें अवतार लेने देना या नहीं लेने देना हमलोगों के हाथ मे ही है! द्वापर युग मे उन्होंने एक कंस का संहार करने के लिए अवतार लिया था,मगर इस कलयुग मे तो कंस जैसे कितने है...वैसे इस कलयुग मे तो वो हर साल अवतार लेते है,लेकिन कंस की इतनी संख्या देखकर वो भी घबरा जाते है.......शायद अब उन्हें भी डर लगने लगा है, या एक युग से दुसरे युग की यात्रा कर थक चुके है.....
सखी
नमस्ते
कृष्ण के बहाने आपने जो वर्तमान समय मे व्याप्त विसंगतियो क़ी ओर इशारा किया है , ये सारी समस्याएँ हमारी और हमारे देश क़ी प्रगति में बाधक हैं. हमारे समाज के लिए घातक हैं. आज अब वह समय आ गया है कि हम सब को इन तमाम बुराइयों का डट कर मुकाबला करना होगा.
धन्यवाद हमको कुछ सोचने पर मज़बूर करने के लिए.
आपका
विजय तिवारी " किसलय "
sakhi ji khamma gani
kanha aap ki bhawanao ko jarur samzega.jab bhi avtar lega tab kans ka vadh jarur hoga.
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