
ये आवाज कैसी है
जो दिल पर दस्तक देती है
क्यो भला फिर सुनूँ मैं कुछ
जब कोई आहट होती है
तुम्हारी सांसो की आवाज
या एक वो अहसास
भर देता है जब जीवन
फिर अब है क्यो ये क्रंदन
दूर कभी होती है जब
आवाज कही सन्नाटे में
ऐसे दूर हुई है वो
क्या लौटेगी ????
फिर कभी इस गली
न जाने कब कैसे होगा
उन कदमो का इस दर तक आके
फिर यूही अचानक कभी
आकर दस्तक देना
और ये पूछना......
क्या मैं आ सकती हूँ ????
इस दालान से गुजर के
तेरे दिल तक जा सकती हूँ .............. रात्रि 2.४० ऍम २/२/०९
6 comments:
एक उदासी......जो दिल तक उतर आई,बिना किसी आहट के.
यकीन कर तू भी खुदा
एक रोज़ पिघल जायेगा
दालान से दूर एक दिन
मेरा दिया तू ही जलाएगा
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वो रौशनी जितनी तू देकर गया था
मैंने ग़म के अंधेरों में बिता दी सारी
वो साँसे जितनी तू छोड़कर गया था
मैंने जीली है ज़िन्दगी उतनी तुम्हारी
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मुझमें मेरा तो कुछ भी नहीं है
मेरा खुदा तुझे ख़बर ये बखूबी है
तू मुझसे सिर्फ़ बातें नहीं करता
तेरे होंटों से हर्फ़ के संग साँस चली है
आज साँसों कमी है, हाँ कमी है
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अति सुंदर.
धन्यवाद
shukriyaaaaaaaaaaa...
ham doino jab sang ho to udaasi ka kya kaam hai na???
miss u love u
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sagar andaaaz-e-byaan acha laga
shurkiya
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raaj ji pasand kiya shukriya
regrds
sakhi
nice poem........
saraswatlok ji
shukriya apne saraha
sakhi
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