Saturday, January 17, 2009

मुझमे तिलिस्म बरक़रार रहे



चारो तरफ़ का तिलिस्म
धीरे धीरे टूट रहा है
धीरे धीरे हर रिश्ता मेरा
पीछे कही छूट रहा है

सुनो तुम तो जानते हो ना
ये रिश्ते मेरी जान है
फिर अब क्यो बदल रहे है
ये वक्त की आग में क्यो
इस तरह जल रहे है
इनमे जो आत्मा थी बसी
कहा वो खो गयी है
जो सुबह हुआ करते थे कभी
अब उनकी रात हो गयी है
कही रातों में गुम होकर
हम भी रह ना जाए
मेरे सपनो का महल भी
कहीं युही ढह ना जाए
कुछ तो ऐसा कर दो ना
मुझमे तिलिस्म बरक़रार रहे
रिश्तो से मुझे प्यार रहे
ऐसे प्राण भर दो ना
सुनो तुम ही कुछ तो कर दो ना


समय रात्रि ११.३० , दिनांक ..१७ /१/०९

10 comments:

राजीव तनेजा said...

भावनाओं से ओत-प्रोत सुन्दर कविता

Reetesh Gupta said...

बहुत सुंदर प्रस्तुति ....अच्छा लगा पढ़कर ...बधाई

राज भाटिय़ा said...

चारो तरफ़ का तिलिस्म
धीरे धीरे टूट रहा है
धीरे धीरे हर रिश्ता मेरा
पीछे कही छूट रहा है
बहुत सुंदर कविता कही आप ने, बहुत भावुक, लेकिन आज सब के साथ यही हाल है.
धन्यवाद

श्रद्धा जैन said...

wah kya baat kahi hai
rishton main pyaar rahe
tilism barqar rahe suno tumhi kuch kar do na

bhaut gahra hamesha hi tarah

के सी said...

achchi lagi.

रश्मि प्रभा... said...

रिश्तों का तिलिस्म टूटता है,पर किसी एक जगह
विश्वास का दिया जलता है,
यही पास होता है !
बहुत गहरे भाव हैं और बहुत ही सुन्दर

!!अक्षय-मन!! said...

अरे वाह! ही अच्छा लिखा है....
क्या कामना की है आपने
मुझमे तिलिस्म बरक़रार रहे
रिश्तों से मुझे प्यार रहे ....
भावनाओं से ओत -प्रोत रचना

अक्षय-मन

vijay kumar sappatti said...

sakhi ji

kitna sundar aur bhavpoorn hai

चारो तरफ़ का तिलिस्म
धीरे धीरे टूट रहा है
धीरे धीरे हर रिश्ता मेरा
पीछे कही छूट रहा है


these lines are ultimate..

meri shubkaamnayen .. aur likhe ,behtar likhe .

meri nai post dekhiyenga

dhanywad.
vijay

ρяєєтii said...

रिश्ता ...खुद एक तिलिस्म है ..
कभी जुड़ता है ,
कभी छूटता है ,
कभी टूटता है , और
फिर जुड़ता भी है .

वक़्त का खेल है..बस यह
बहोत ही अच्छी रचना..बधाई...

"Apoorv" said...

Too good..

Behtareen... Aur shabd nahi hai mere paas..

आपका मेरे इस ब्लॉग पर हार्दिक स्वागत है ...

आप यहाँ आये बहुत खुशी हुई .आपका प्यार और साथ हमेशा बना रहे, तो बहुत खुशी होगी. ये साथ और प्यार बनाए रखना.

प्यार के साथ
सखी