Thursday, April 16, 2009

*~इश्क़~*


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इश्क़ ज़रा नज़रो मे उतर
उस नज़नीना की नर्गीसी आँखे
बिना दीदार साजन के
तड़पती है, मचली है
ये साँसे उसकी थम थम के
कुछ इस तरह से चलती है
जैसे कोई जीने को बेकरार है
मगर उसे उस साँस का
अभी तलक इंतज़ार है
जो जीने की तमाम वजह
उसे देती जाए
हर लम्हा एक सुकून वो
साजन की बाहो मे पाए

3 comments:

रश्मि प्रभा... said...

प्यार का एक नमकीन एहसास.....

Amit K Sagar said...

MAINE AUR JANAA...

HADON KO KIYA PAAR, BADAA PYAAR
AUR BADAA THODAA MAAFINAAMAA

--
JAB TUM AHSAAS HAI

FIR BHI TUM
PARWAAH MEIN HO
NA JAANE KISKEE

HOTE HUYE BEPARWAAH

MUJHKO

gyaneshwaari singh said...

aap doino ka bhaut bhaut shukriya

आपका मेरे इस ब्लॉग पर हार्दिक स्वागत है ...

आप यहाँ आये बहुत खुशी हुई .आपका प्यार और साथ हमेशा बना रहे, तो बहुत खुशी होगी. ये साथ और प्यार बनाए रखना.

प्यार के साथ
सखी