
visit.. http://www.mahaktepal.com
इश्क़ ज़रा नज़रो मे उतर
उस नज़नीना की नर्गीसी आँखे
बिना दीदार साजन के
तड़पती है, मचली है
ये साँसे उसकी थम थम के
कुछ इस तरह से चलती है
जैसे कोई जीने को बेकरार है
मगर उसे उस साँस का
अभी तलक इंतज़ार है
जो जीने की तमाम वजह
उसे देती जाए
हर लम्हा एक सुकून वो
साजन की बाहो मे पाए
3 comments:
प्यार का एक नमकीन एहसास.....
MAINE AUR JANAA...
HADON KO KIYA PAAR, BADAA PYAAR
AUR BADAA THODAA MAAFINAAMAA
--
JAB TUM AHSAAS HAI
FIR BHI TUM
PARWAAH MEIN HO
NA JAANE KISKEE
HOTE HUYE BEPARWAAH
MUJHKO
aap doino ka bhaut bhaut shukriya
Post a Comment