Monday, December 21, 2009

आस और विश्वास


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आज अनायास ही
तुम्हारी किसी बात से
लगा जैसे तुम भी
सब में शामिल हो गए हो

दे रहे हो मुझे
आस और विश्वास
पर खुद तुम भी
रकीबो के काबिल हो गए हो

8 comments:

राज भाटिय़ा said...

ेक बहुत सुंदर रचना ओर बहुत सुंदर चित्र
कृप्या आश को आस लिखे मेरे ख्याल मै आस सही है

रश्मि प्रभा... said...

लगता है ऐसा जब लोग अपने होकर बन जाते हैं अजनबी

gyaneshwaari singh said...

राज जी
मैंने ठीक कर दिया है वो आस ही है

शुक्रिया अपने सराहा
अच्छा लगा

gyaneshwaari singh said...

सही कहा अपने रश्मि जी
jab लोग अपने होकर पराये बन जाये तो ऐसा होता है
शुक्रिया आप यहाँ आयी

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

wah wah wah...

sakhi ji...
bahut he sundar rachna hai aapki ek baar phir...

cheers
http://shayarichawla.blogspot.com/

हर्षिता said...

सुन्दर रचना है,लिखते रहे।

शेरघाटी said...

nice poetry!
plz keep itup!

yun hi ek khayal mein said...

bohot khoob likha hai aapne

आपका मेरे इस ब्लॉग पर हार्दिक स्वागत है ...

आप यहाँ आये बहुत खुशी हुई .आपका प्यार और साथ हमेशा बना रहे, तो बहुत खुशी होगी. ये साथ और प्यार बनाए रखना.

प्यार के साथ
सखी