
तनहाईयाँ मिली तो हम घबरा के रो दिए
जब याद तेरी आई तो दिल तड़पा के रो दिए
जब ना दिखा कोई हमें अपने आस पास
तब याद तेरी हर तरफ बिखरा के रो दिए
तुम इस तरह गये कि हर खुशी साथ ले गये
जब दुख ने आके घेरा तो घबरा के रो दिए
कोई भी याद ना करे हमें आज कल' सखी'
ये बात याद आई तो दिल को समझा के रो दिए
जब याद तेरी आई तो दिल तड़पा के रो दिए
जब ना दिखा कोई हमें अपने आस पास
तब याद तेरी हर तरफ बिखरा के रो दिए
तुम इस तरह गये कि हर खुशी साथ ले गये
जब दुख ने आके घेरा तो घबरा के रो दिए
कोई भी याद ना करे हमें आज कल' सखी'
ये बात याद आई तो दिल को समझा के रो दिए
2 comments:
ab aap ye rona-dhona band kar dijiye,ham hai na yaad karne ke liye.....ha ha ha ha......
सखी जी
नमस्कार
आपकी रचना पढ़ी
अंदाज़े बयाँ क़ाबिले तारीफ है
कितना सही कहा है आपने
तुम इस तरह गये कि हर खुशी साथ ले गये
जब दुख ने आके घेरा तो घबरा के रो दिए
और ये पँतियाँ भी अच्छी लगी....
कोई भी याद ना करे हमें आज कल' सखी'
ये बात याद आई तो दिल को समझा के रो दिए
जब अपने ही हमें भूल जाते हैं तो
खुद को समझाने के अलावा हमारे
पास रह ही क्या जाता है
अच्छी बात है...
आपका
विजय तिवारी " किसलय :
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