Sunday, July 20, 2008

तब याद तेरी हर तरफ बिखरा के रो दिए


तनहाईयाँ मिली तो हम घबरा के रो दिए
जब याद तेरी आई तो दिल तड़पा के रो दिए

जब ना दिखा कोई हमें अपने आस पास
तब याद तेरी हर तरफ बिखरा के रो दिए

तुम इस तरह गये कि हर खुशी साथ ले गये
जब दुख ने आके घेरा तो घबरा के रो दिए

कोई भी याद ना करे हमें आज कल' सखी'
ये बात याद आई तो दिल को समझा के रो दिए

2 comments:

वेद प्रकाश सिंह said...

ab aap ye rona-dhona band kar dijiye,ham hai na yaad karne ke liye.....ha ha ha ha......

विजय तिवारी " किसलय " said...

सखी जी
नमस्कार
आपकी रचना पढ़ी
अंदाज़े बयाँ क़ाबिले तारीफ है
कितना सही कहा है आपने

तुम इस तरह गये कि हर खुशी साथ ले गये
जब दुख ने आके घेरा तो घबरा के रो दिए

और ये पँतियाँ भी अच्छी लगी....

कोई भी याद ना करे हमें आज कल' सखी'
ये बात याद आई तो दिल को समझा के रो दिए

जब अपने ही हमें भूल जाते हैं तो
खुद को समझाने के अलावा हमारे
पास रह ही क्या जाता है

अच्छी बात है...

आपका
विजय तिवारी " किसलय :

आपका मेरे इस ब्लॉग पर हार्दिक स्वागत है ...

आप यहाँ आये बहुत खुशी हुई .आपका प्यार और साथ हमेशा बना रहे, तो बहुत खुशी होगी. ये साथ और प्यार बनाए रखना.

प्यार के साथ
सखी