अपनी भावनाओ को व्यक्त करने की कोशिश ...और क्या करूँ ? क्या ना करूँ की उलझन से खुद को बाहर निकालने का एक सहारा ...
हो खुशियों में बरसात
देते है ये आंसु हर पल
देखो सच्चा साथ
आँखों से एक रिश्ता ऐसा
बना लिया है आंसु ने
निकल पड़े ये आँखों से अक्सर
आंसुओं की पैनी भाषा आंसू भरी आँखें ढूंढती हैंकितना कुछ एक बूंद में कह जाती हैं यह हरदम अपने होने का एहसास देती हैसदा हमारे साथ चलती है........बहुत बढिया ... बोलते से शब्द हैं इस ब्लॉग में
chhoti si rachna hai,magar sach bolti hai...chhoti muh badi baat.excellent.
shukriya aap doino ka apne pasand kiya...regardssakhi
सखी जीनमस्कारआँसू भी क्या साथी हैं हमारे, हम मन में सोचते हैं वे बाहर निकल कर बता देते हैंआँखों से एक रिश्ता ऐसा बना लिया है आंसु ने निकल पड़े ये आँखों से अक्सर कोई भी हो चाहे बात आपकासाहित्य सहचरडॉ. विजय तिवारी "किसलय " जबलपुर
bhut bhut acha likha ha
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आप यहाँ आये बहुत खुशी हुई .आपका प्यार और साथ हमेशा बना रहे, तो बहुत खुशी होगी. ये साथ और प्यार बनाए रखना.प्यार के साथसखी
5 comments:
आंसुओं की पैनी भाषा आंसू भरी आँखें ढूंढती हैं
कितना कुछ एक बूंद में कह जाती हैं
यह हरदम अपने होने का एहसास देती है
सदा हमारे साथ चलती है........
बहुत बढिया ...
बोलते से शब्द हैं इस ब्लॉग में
chhoti si rachna hai,magar sach bolti hai...chhoti muh badi baat.excellent.
shukriya aap doino ka apne pasand kiya...
regards
sakhi
सखी जी
नमस्कार
आँसू भी क्या साथी हैं हमारे, हम मन में सोचते हैं वे बाहर निकल कर बता देते हैं
आँखों से एक रिश्ता ऐसा
बना लिया है आंसु ने
निकल पड़े ये आँखों से अक्सर
कोई भी हो चाहे बात
आपका
साहित्य सहचर
डॉ. विजय तिवारी "किसलय "
जबलपुर
bhut bhut acha likha ha
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