Friday, August 1, 2008

*** @ आंसु @ ***

दुःख में भी साथ दे

हो खुशियों में बरसात

देते है ये आंसु हर पल

देखो सच्चा साथ

आँखों से एक रिश्ता ऐसा

बना लिया है आंसु ने

निकल पड़े ये आँखों से अक्सर

कोई भी हो चाहे बात

5 comments:

रश्मि प्रभा... said...

आंसुओं की पैनी भाषा आंसू भरी आँखें ढूंढती हैं
कितना कुछ एक बूंद में कह जाती हैं
यह हरदम अपने होने का एहसास देती है
सदा हमारे साथ चलती है........
बहुत बढिया ...
बोलते से शब्द हैं इस ब्लॉग में

वेद प्रकाश सिंह said...

chhoti si rachna hai,magar sach bolti hai...chhoti muh badi baat.excellent.

gyaneshwaari singh said...

shukriya aap doino ka apne pasand kiya...
regards
sakhi

विजय तिवारी " किसलय " said...

सखी जी
नमस्कार
आँसू भी क्या साथी हैं हमारे, हम मन में सोचते हैं वे बाहर निकल कर बता देते हैं

आँखों से एक रिश्ता ऐसा
बना लिया है आंसु ने
निकल पड़े ये आँखों से अक्सर
कोई भी हो चाहे बात

आपका

साहित्य सहचर
डॉ. विजय तिवारी "किसलय "
जबलपुर

Unknown said...

bhut bhut acha likha ha

आपका मेरे इस ब्लॉग पर हार्दिक स्वागत है ...

आप यहाँ आये बहुत खुशी हुई .आपका प्यार और साथ हमेशा बना रहे, तो बहुत खुशी होगी. ये साथ और प्यार बनाए रखना.

प्यार के साथ
सखी