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उसने पूछा है
कहा गुम रहती हों ??
मैंने कहा उससे
इसी जहाँ मैं,
जिंदगी ढूँढती हुई
कविताओ मैं ,
या जिंदगी में उतरते
किसी शेर में खोई
मै यही तो होती हूँ ;
पर शायद
हर नज़र में रहकर भी
हर नज़र से दूर
कही हों रही हूँ मैं ,
या अपनी भी नजरों से
कही खो गयी हूँ मैं .
3 comments:
सुन्दर रचना...
सही कहा आपने कि आप खो गई हैँ...तभी आपकी कोई टिप्पणी नहीं मिलती है :-)
हर नज़र में रहकर भी
हर नज़र से दूर
कही हों रही हूँ मैं ,
या अपनी भी नजरों से
कही खो गयी हूँ मैं .
बहुत सुंदर लगी आप की यह कविता.
धन्यवाद
bhut sunder rachana likhi hai apne
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